कहीं टॉयलेट सोप या एनिमल सोप से तो नहीं नहा रहे आप?

भारत में अनजाने में लगभग 80% लोग टॉयलेट सोप से ही नहाते हैं। यह हम नहीं कह रहे हैं, यह आंकड़े बताते हैं। सन 2016-17 के बीच हुए एक सर्वे के अनुसार भारत में लोग जानकारी के आभाव में टॉयलेट सोप से ही नहाते हैं। इतना ही नहीं कई लोग एनिमल सोप तक से नहाते हैं। तो इसी क्रम में हम जानते हैं कि कहीं आप भी जाने अनजाने में टॉयलेट सोप का इस्तेमाल तो नहीं करते?

टॉयलेट सोप आपके स्किन को काफी नुकसान पहुंचा सकता है

अपने शरीर को फ्रेश और शुद्ध रखने के लिए हम साबुन लगाकर नहाते हैं, अब ऐसे में क्या हो अगर हम टॉयलेट सोप या फिर जानवरों को नहलाये जाने वाले साबुन का प्रयोग खुद के लिए करने लगे? 

गलत साबुन का चयन हमारे स्क्रीन को बहुत बुरी तरह से नुकसान पहुंचा सकता है। अब ऐसे में आपको सही साबुन कैसे चुनना चाहिए और आप किस प्रकार से अपने वर्तमान साबुन को जांच सकते हैं कि वह टॉयलेट सोप है या नहीं?

सही साबुन की पहचान कैसे करें?

अक्सर हम साबुन विज्ञापन देखकर खरीदते हैं, या फिर किसी हीरो हीरोइन या बड़े चेहरे को इसका प्रचार करता हुआ देख हम वह साबुन खरीद लेते हैं। परंतु आपको शायद यह पता नहीं होगा कि इनमें से कोई भी हीरो हीरोइन इन साबुनों का उपयोग नहीं करते हैं। बाजार से साबुन खरीदते समय हम केवल साबुन की कीमत देख कर उसे खरीद लेते हैं। हम अक्सर यह सोचते हैं कि ज्यादा महंगा साबुन ज्यादा अच्छा होगा परंतु यह हमारी भूल होती है।

टॉयलेट सोप Lifebuoy TFM Value
Lifebuoy TFM Value

हमें साबुन खरीदने से पहले उस में इस्तेमाल किए गए तत्वों को देखना चाहिए तथा उस साबुन की TFM Total Fatty Matter वैल्यू को चेक करना चाहिए। ज्यादातर मामलों में हम टॉयलेट सोप या फिर कार्बोलिक सोप खरीद लेते हैं। कई साबुनों में जानवरों की चर्बी तक का इस्तेमाल किया जाता है परंतु इन सब से अनजान हम ऐसे खराब प्रोडक्ट को खरीद लेते हैं।

बाजार में कितने प्रकार के साबुन उपलब्ध हैं?

बाजार में हजारों प्रकार के साबुन उपलब्ध है, लेकिन यहां आपको घबराने की जरूरत नहीं है। मुख्यतः साबुन दो प्रकार के ही होते हैं – 1. रासायनिक साबुन 2. आयुर्वेदिक/ हर्बल साबुन

हमारे देश में बहुत कम ही ऐसे  ब्रांड हैं जो आयुर्वेदिक या हर्बल साबुन बनाते हैं और बहुत ही कम ऐसे साबुन हैं जिन्हें Bathing Soap अर्थात नहाने वाले साबुन का दर्जा मिला है। 

अधिकतर मामलों में साबुन पर टॉयलेट सोप नहीं लिखा होता है, जिस कारण हम उसे नहाने वाला साबुन समझकर खरीद लेते हैं। लेकिन आपका साबुन नहाने योग्य है या नहीं यह उसके TFM वैल्यू से पता चलता है। साबुन के TFM वैल्यू के अलावा भी साबुन पर कई अन्य डीटेल्स भी दी गई होती हैं, जिनसे हम यह पता कर सकते हैं कि हमारा साबुन कितने अच्छे क्वालिटी का है।

साबुन में TFM वैल्यू क्या होती है?

हर सामान की गुणवत्ता को मापने की एक इकाई होती है, जिससे हम यह पता लगा सकते हैं कि वह सामान किस प्रकार का है और हमारे लिए कितना उपयोगी या अनुपयोगी है। जिस प्रकार बाइक के इंजन की क्षमता हम CC में नापते हैं, इंटरनेट के स्पीड की क्वालिटी हम लेटेंसी और MB या GB में नापते हैं, ठीक उसी प्रकार से साबुन की गुणवत्ता TFM  से पता चलती है। इसके जरिए हम साबुन में उपयोग हुए केमिकल्स व अन्य प्रकार के रसायनों की मात्रा का पता लगा सकते हैं। यदि सीधा-सीधा समझे तो जिस साबुन की TFM का प्रतिशत जितना अधिक होगा वह साबुन उतनी ही अच्छी क्वालिटी का होगा।

TFM मुख्यतः तीन GRADE में बंटे हैं

GRADE-1 :-75% से 80% तक

GRADE-2 :-65% से 75% तक

GRADE-3 :-50% से 60% तक

हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले कुछ साबुनों के ब्रांड्स और उनकी ग्रेडिंग

कुछ साबुनों के ग्रेड

नहाने के लिए किस ग्रेड के साबुन का प्रयोग करना चाहिए?

  • ग्रेड – 1 साबुन

नहाने के लिए हमें हमेशा ग्रेड वन साबुन का उपयोग करना चाहिए। ग्रेड वन साबुन को बाथिंग सोप भी कहा जाता है। इन साबुनों में TFM की मात्रा 75% से अधिक होती है। यह साबुन हमारी त्वचा के लिए बहुत ही अच्छे होते हैं। इन साबुनों के उपयोग से हम कई प्रकार के चर्म रोगों से बच सकते हैं, इसके साथ ही यह सब उन हमारी त्वचा के लिए काफी लाभकारी भी होते हैं।

  • ग्रेड – 2 साबुन 

वही ग्रेड – 2 के साबुन को टॉयलेट सोप की कैटेगरी में रखा जाता है, इन साबुनों का उपयोग शौच इत्यादि करने के बाद हाथ धोने के काम में लिया जाता है। परंतु भारत में लगभग 80% से अधिक लोग नहाने के लिए इसी साबुन का प्रयोग करते हैं।

  • ग्रेड – 3 साबुन 

ग्रेड 3 के साबुन में 60% से कम TFM की मात्रा होती है। कई बार इन साबुनों में फिनायल तक मिलाया जाता है। ऐसे साबुन का उपयोग फर्श को साफ करने या फिर जानवरों के शरीर में पड़े कीड़े मकोड़ों को साफ करने में किया जाता है। यह साबुन हमारी त्वचा के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं। ऐसे साबुन से हमें बहुत अधिक बचना चाहिए।

कुछ साबुनों में TFM (Total Fatty Matter) की मात्र

साबुनों में उपलब्ध TFM की मात्र

सुगंधित साबुन कितने खतरनाक होते हैं?

अधिकतर मामलों में सुगंधित साबुन का प्रचार किया जाता है, जिस कारण भोली-भाली जनता सुगंधित साबुन के नाम पर ग्रेड 2 या ग्रेड 3 के साबुन खरीद लेती है। ऐसे साबुन में बहुत अधिक मात्रा में केमिकल्स का उपयोग किया जाता है और बाद में इनमें अधिक झाग बनाने के लिए सोडियम लॉरिल सल्फेट का उपयोग किया जाता है। जिससे हमारी त्वचा शुष्क हो जाती है और हमें ड्राई स्किन की प्रॉब्लम हो जाती है। शुरुआती समय में इन साबुनों का प्रयोग करते ही हमारे त्वचा पर एक सफेदी जैसा निखार आ जाता है। परंतु धीरे-धीरे इनसे हमें दाद खाज खुजली जैसे कई प्रकार के रोग होने लगते हैं। अतः हर प्रकार से केमिकल साबुन का प्रयोग हमें छोड़ देना चाहिए।

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डॉक्टर्स के अनुसार कैसा साबुन सबसे अच्छा होता है?

अधिकतर डॉक्टर्स के अनुसार साबुन ‘फ्री क्लींजर’ अथवा हर्बल साबुन सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह हमारी त्वचा को हर प्रकार के नुकसान से बचाते हैं और गहराई तक त्वचा की सफाई बिना किसी नुकसान के हो जाती है।  इसके अलावा यदि आपको स्किन से संबंधित कोई भी रोग हो तो डॉक्टर की सलाह से ही साबुन का प्रयोग करना चाहिए। ऐसा करने से आप कई प्रकार के त्वचा संबंधित बीमारियों से बच सकते हैं।

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